इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स के लिए हैवी इक्विपमेंट रेंटल सर्विस देने वाली Trishakti Industries Ltd के शेयर आज चर्चा में रहे। वजह है कंपनी को Reliance Industries Ltd से मिला नया वर्क ऑर्डर, जिसके बाद स्टॉक में तेज़ मूवमेंट देखने को मिला। ₹240 करोड़ के मार्केट कैप वाली इस कंपनी का शेयर इंट्राडे में ₹154.80 तक पहुंच गया, जो पिछले क्लोज़ ₹143.35 से काफ़ी ऊपर है। दिलचस्प बात यह है कि बीते 5 सालों में यह स्टॉक 10,000% से ज्यादा का रिटर्न दे चुका है, इसलिए रिटेल निवेशकों की नजर इस पर बनी रहती है।

क्या है नया ऑर्डर
कंपनी को रिलायंस इंडस्ट्रीज़ से ₹2.65 करोड़ का घरेलू वर्क ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर एडवांस्ड मशीनरी और स्किल्ड मैनपावर की तैनाती से जुड़ा है और इसकी अवधि 6 महीने की है।
यह प्रोजेक्ट दिखाता है कि Trishakti कम समय में बड़े इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स के लिए मशीनरी और ऑपरेशंस दोनों मैनेज करने की क्षमता रखती है।
ऑर्डर से जुड़ी मुख्य बातें
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| क्लाइंट | Reliance Industries |
| ऑर्डर वैल्यू | ₹2.65 करोड़ |
| कॉन्ट्रैक्ट अवधि | 6 महीने |
| काम का प्रकार | मशीनरी + मैनपावर डिप्लॉयमेंट |
| नेचर | घरेलू ऑर्डर |
₹21 करोड़ का कैपेक्स क्यों अहम है
इस ऑर्डर को एग्ज़िक्यूट करने के लिए कंपनी ने करीब ₹21 करोड़ (₹210 मिलियन) का नया कैपेक्स शुरू किया है। इसका मकसद नई और बेहतर मशीनरी खरीदना है, ताकि आने वाले समय में बड़े और ज्यादा वैल्यू वाले प्रोजेक्ट्स भी हैंडल किए जा सकें।
यानी ऑर्डर भले ही ₹2.65 करोड़ का है, लेकिन कंपनी इसे स्केलेबिलिटी के तौर पर देख रही है, न कि सिर्फ शॉर्ट-टर्म रेवेन्यू के रूप में।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस एक नजर में
Q2 FY26 में कंपनी की ग्रोथ काफी मजबूत रही है।
| आंकड़े | Q2 FY25 | Q2 FY26 |
|---|---|---|
| रेवेन्यू | ₹2.85 करोड़ | ₹6.65 करोड़ |
| नेट प्रॉफिट | ₹0.87 करोड़ | ₹1.59 करोड़ |
| YoY ग्रोथ | — | ~133% |
मजबूत क्लाइंट बेस
Trishakti Industries के क्लाइंट्स में L&T, Reliance, Tata Group, Adani Group, ONGC, Tata Steel, Power Grid जैसे बड़े नाम शामिल हैं। कंपनी कंस्ट्रक्शन, टेलीकॉम, रेलवे, एनर्जी, ऑयल-गैस और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे सेक्टर्स में काम करती है।
निष्कर्ष
रिलायंस से मिला यह ऑर्डर और उसके साथ किया गया बड़ा कैपेक्स दिखाता है कि Trishakti Industries सिर्फ छोटे कॉन्ट्रैक्ट्स तक सीमित नहीं रहना चाहती। इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल सर्विसेज में स्केल-अप करने की यह रणनीति कंपनी को आने वाले समय में और फोकस में रख सकती है।
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